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प्रॉफ़िट/लॉस · ब्रेकईवन

दो हिसाब एक ही जगह: यह सौदा अभी कितने परसेंट ऊपर-नीचे है, और नुकसान में जाने के बाद ब्रेकईवन के लिए कितना चढ़ना बाकी है। अंदाज़े की जगह नंबर।

प्रॉफ़िट-लॉस %

पूरा हिसाब आपके ब्राउज़र में ही होता है, कोई नंबर कहीं अपलोड नहीं होता। इसमें फ़ीस, स्लिपेज और टैक्स शामिल नहीं हैं।

फ़ॉर्मूला एक ही लाइन का है

प्रॉफ़िट-लॉस % = (मौजूदा भाव − खरीद भाव) ÷ खरीद भाव × 100। ₹20 में लिया, ₹25 हो गया — 25% ऊपर। ₹15 पर आ गया — 25% नीचे। पेच फ़ॉर्मूले में नहीं, आदत में है: ज़्यादातर लोग रुपये का फ़र्क़ देखकर अंदाज़ा लगा लेते हैं। ₹5 चढ़ गया सुनने में ठीक-ठाक लगता है, लेकिन वह ₹5 ₹20 वाली लागत पर 25% है और ₹500 वाली लागत पर सिर्फ़ 1%। खरीद भाव वाले खाने में अपनी लागत डालिए, मौजूदा भाव वाले में अभी का भाव — नतीजा पॉज़िटिव आया तो ऊपर हैं, निगेटिव आया तो नीचे।

जितना गहरा नुकसान, उतनी टेढ़ी वापसी

यही वह हिस्सा है जिसे नए लोग सबसे ज़्यादा हल्के में लेते हैं। गिरावट आपकी पूरी रकम पर लगती है, लेकिन उछाल सिर्फ़ बची हुई रकम पर मिलता है। ₹100 में से 20% गया तो ₹80 बचे, और ₹100 पर लौटने के लिए इन ₹80 को 25% चढ़ना होगा। आधा गया तो ₹50 बचे — अब 100% चाहिए। 80% गया तो ₹20 बचे, और वापसी के लिए 400% चढ़ना पड़ेगा। फ़ॉर्मूला: ज़रूरी बढ़त = नुकसान% ÷ (100 − नुकसान%) × 100। ऊपर ब्रेकईवन वाला बटन दबाकर अपना नुकसान डालिए और चढ़ाई खुद देख लीजिए। बात यहाँ आकर टिकती है कि कम गँवाना अक्सर ज़्यादा कमाने से भारी पड़ता है: 20% पर निकल गए तो 25% वाली एक चाल बराबरी करा देती है; 70% तक टिके रहे तो आगे 233% वाली चाल चाहिए, और वैसी चालें कैलेंडर देखकर नहीं आतीं।

यह कैलकुलेटर क्या नहीं बताता

तीन चीज़ें इसके दायरे से बाहर हैं, और तीनों असली रकम पर असर डालती हैं। पहली, फ़ीस — यहाँ सिर्फ़ भाव का हिसाब है, जबकि खरीदते और बेचते, दोनों तरफ़ फ़ीस कटती है, इसलिए स्क्रीन पर बराबरी दिखने के बाद भी असल में थोड़ा फ़ासला बचा होता है। दूसरी, लेवरेज — फ़्यूचर्स में मुनाफ़ा-नुकसान गुना होकर लगता है और लिक्विडेशन पहले आ जाता है, वहाँ यह हिसाब लागू नहीं होता। तीसरी, और भारत में सबसे ज़्यादा छूटने वाली: कागज़ पर ब्रेकईवन ≠ जेब में ब्रेकईवन। मुनाफ़े पर 30% टैक्स और ट्रांसफ़र पर 1% TDS (Section 393(1), पहले 194S) जैसे प्रावधान लागू होते हैं, और नुकसान को दूसरे मुनाफ़े से सेट-ऑफ़ भी नहीं किया जा सकता — यानी स्क्रीन वाली बराबरी और बैंक खाते वाली बराबरी एक जगह नहीं बैठतीं। यह आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें। पूरा गणित TDS और टैक्स वाली गाइड में है, और अपने नंबर डालकर देखना हो तो TDS · टैक्स कैलकुलेटर इसी के लिए है। एक आख़िरी बात: ब्रेकईवन नतीजा है, रणनीति नहीं। लागत भाव पर टकटकी लगाए बैठे रहने से छोटा नुकसान अक्सर बड़ा हो जाता है। भाव के पीछे के सिग्नल पढ़ने हों तो क्रिप्टो चार्ट कैसे देखें से शुरू कीजिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रॉफ़िट-लॉस परसेंट निकालते कैसे हैं?
(मौजूदा भाव − खरीद भाव) ÷ खरीद भाव × 100। ₹20 में लिया और अभी ₹25 है तो (25−20)÷20×100 यानी 25% ऊपर; ₹15 पर आ गया तो (15−20)÷20×100 यानी 25% नीचे। नए लोग अक्सर रुपये का फ़र्क़ देखकर अंदाज़ा लगा लेते हैं कि ₹5 चढ़ गया, जबकि मायने यह रखता है कि वह ₹5 आपकी लागत का कितना हिस्सा है।
50% गिरने पर 100% ही क्यों चढ़ना पड़ता है?
गिरावट पूरी रकम पर लगती है, चढ़ाई सिर्फ़ बची हुई रकम पर। ₹100 आधे हुए तो ₹50 बचे; इन ₹50 को दोबारा ₹100 बनाना है, यानी ₹50 और चाहिए — जो बची हुई रकम का 100% है। फ़ॉर्मूला: ज़रूरी बढ़त = नुकसान% ÷ (100 − नुकसान%) × 100। इसीलिए नुकसान जितना गहरा, वापसी की चढ़ाई उतनी ही टेढ़ी।
क्या यह हिसाब TDS और टैक्स के बाद वाला है?
नहीं। यह कैलकुलेटर सिर्फ़ भाव का हिसाब लगाता है, यानी कागज़ पर ब्रेकईवन। भारत में क्रिप्टो के मुनाफ़े पर 30% टैक्स और ट्रांसफ़र पर 1% TDS (Section 393(1), पहले 194S) जैसे प्रावधान लागू होते हैं, और नुकसान को दूसरे मुनाफ़े से सेट-ऑफ़ भी नहीं किया जा सकता — इसलिए जेब वाला ब्रेकईवन स्क्रीन वाले से ऊपर बैठता है। यह सब आयकर नियमों के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार है; यह टैक्स सलाह नहीं है — अपनी स्थिति के लिए CA से पूछें।

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